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गाजा संकट पर ट्रंप की सख्त चेतावनी: हमास तुरंत पीछे हटे

वॉशिंगटन से आई एक बड़ी खबर ने एक बार फिर मध्य-पूर्व की राजनीति में हलचल मचा दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को फिलिस्तीनी आतंकवादी संगठन हमास को सख्त चेतावनी दी है कि वह तुरंत गाजा से पीछे हटे, अन्यथा गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। हाल के दिनों में इजरायल द्वारा गाजा पर की जा रही बमबारी में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है, जिसे ट्रंप ने शांति प्रक्रिया की दिशा में सकारात्मक कदम बताया। अमेरिका की मध्यस्थता से बनी नई “गाजा शांति योजना” के प्रभाव में आने के बाद इजरायल ने आक्रामक रवैया नरम किया है, लेकिन हमास अब भी अपने पुराने रुख पर अड़ा हुआ है।

ट्रंप प्रशासन ने पिछले कई महीनों से गाजा संकट को सुलझाने के लिए गुप्त और सार्वजनिक दोनों स्तरों पर पहल तेज की हुई है। हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म “ट्रूथ सोशल” पर पोस्ट करते हुए कहा, “मैं इजरायल की इस बात के लिए सराहना करता हूं कि उसने बंधकों की रिहाई और शांति समझौते को आगे बढ़ाने के लिए बमबारी को अस्थायी रूप से रोका है। लेकिन अब हमास को जल्द से जल्द ठोस कदम उठाना होगा। मैं किसी भी देरी को बर्दाश्त नहीं करूंगा। अगर गाजा दोबारा खतरा बना, तो सारी शर्तें रद्द मानी जाएंगी।”

इस बयान के साथ ही ट्रंप ने साफ कर दिया है कि अमेरिका अब मध्य-पूर्व में अपने “Peace through Strength” (शक्ति के माध्यम से शांति) के सिद्धांत पर अडिग रहेगा। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी दूत जेरेड कुशनर (जो ट्रंप के दामाद भी हैं) और वरिष्ठ राजनयिक स्टीव विटकॉफ मिस्र रवाना हो रहे हैं। दोनों अधिकारी हमास की ओर से बंधकों की रिहाई पर बातचीत को अंतिम रूप देंगे। व्हाइट हाउस सूत्रों के अनुसार, यह दौरा दो साल से जारी इस संघर्ष के अंत की दिशा में एक निर्णायक कदम माना जा रहा है।

गाजा में हालात फिलहाल नाजुक हैं, लेकिन युद्ध की तीव्रता घटती दिख रही है। गाजा शहर के अस्पताल अधिकारी ने पुष्टि की है कि इजरायल की तरफ से बमबारी में उल्लेखनीय कमी आई है। हालांकि, ताजा हमले में कम से कम पांच फिलिस्तीनी नागरिकों के मारे जाने की खबर है। इजरायली सेना के प्रवक्ता ने बताया कि प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के निर्देश पर अब सेना रक्षात्मक स्थिति में रहेगी और सक्रिय हमला नहीं करेगी। इसका मतलब है कि इजरायल ने अपनी रणनीति को “Defense Mode” में शिफ्ट किया है, हालांकि किसी भी सैनिक को वापस नहीं बुलाया गया है।

इजरायल के इस कदम को अमेरिकी शांति योजना का पहला चरण माना जा रहा है। यह योजना तीन मुख्य हिस्सों में विभाजित है:

पहला चरण: हमलों में अस्थायी विराम और मानवीय सहायता का मार्ग खोलना।

दूसरा चरण: हमास द्वारा बंधकों की रिहाई और हथियारों का सीमित समर्पण।

तीसरा चरण: मिस्र और जॉर्डन की मध्यस्थता से एक स्थायी संघर्षविराम और पुनर्निर्माण प्रक्रिया।

ट्रंप प्रशासन के नज़दीकी सूत्रों का कहना है कि इस बार शांति वार्ता “ट्रंप शैली” में हो रही है — यानी तेज़, सीधे और बिना किसी अस्पष्टता के। ट्रंप के बयान “मैं देरी बर्दाश्त नहीं करूंगा” को अमेरिकी मीडिया ने एक तरह की “final ultimatum” के रूप में देखा है।

गौरतलब है कि यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में हो रहा है जब आने वाले सप्ताह में 7 अक्टूबर 2023 को हुए हमास के इजरायल पर हमले की दूसरी बरसी है। वही हमला, जिसने इजरायल-गाजा युद्ध की शुरुआत की थी। इस पृष्ठभूमि में ट्रंप का नया संदेश न केवल हमास के लिए चेतावनी है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि अमेरिका अब इस संघर्ष को लंबा खींचने नहीं देगा।

इजरायल के प्रधानमंत्री कार्यालय ने शुक्रवार को बयान जारी किया था कि देश युद्ध को समाप्त करने और क्षेत्र में स्थायी शांति लाने के लिए अमेरिकी सहयोग की सराहना करता है। बयान में कहा गया, “हमारा उद्देश्य केवल सैन्य जीत नहीं बल्कि स्थायी शांति और सुरक्षा है।”

इस बीच, हमास की ओर से अभी तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि, हमास से जुड़े स्थानीय मीडिया ने ट्रंप के बयान को “राजनीतिक दबाव” करार दिया है और कहा है कि “गाजा की जनता किसी विदेशी शक्ति से भयभीत नहीं होगी।”

गाजा के नागरिकों के लिए यह समय बेहद कठिन है। लगातार बमबारी से तबाह हुए शहर में जीवन धीरे-धीरे सामान्य हो रहा है, पर हर दिन एक अनिश्चितता बनी हुई है। राहत एजेंसियों के अनुसार, बिजली और पानी की सप्लाई अब भी सीमित है, और अस्पतालों पर दबाव बढ़ता जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप का यह बयान केवल हमास को नहीं, बल्कि पूरी अंतरराष्ट्रीय बिरादरी को एक संदेश है कि अमेरिका अब मध्य-पूर्व में अपनी निर्णायक भूमिका फिर से स्थापित कर रहा है। उनके नेतृत्व में अमेरिकी कूटनीति “pressure-based diplomacy” की दिशा में लौटती दिख रही है।

दूसरी ओर, इजरायल का बमबारी रोकने का फैसला यह दर्शाता है कि वह भी अब स्थायी समाधान की तलाश में है। हालांकि, हमास की प्रतिक्रिया और मिस्र में होने वाली बातचीत का परिणाम ही तय करेगा कि यह युद्धविराम अस्थायी है या स्थायी।

यदि यह योजना सफल होती है, तो दो साल से चल रहे इस संघर्ष का अंत संभव है। लेकिन यदि हमास अड़ा रहा, तो ट्रंप प्रशासन द्वारा सैन्य या आर्थिक दबाव बढ़ाने की पूरी संभावना है।

गाजा संकट पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का सख्त रुख एक बार फिर यह साबित करता है कि वॉशिंगटन क्षेत्रीय स्थिरता के लिए अब निर्णायक नीति अपनाने को तैयार है। इजरायल ने शांति की दिशा में एक कदम बढ़ाया है, लेकिन अब गेंद हमास के पाले में है। आने वाले कुछ दिनों में यह तय होगा कि गाजा का यह युद्ध इतिहास बनता है या एक और नया अध्याय खोलता है।

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